Wednesday, May 6, 2009

तस्सवूर

तस्सवूर में जिस हूर हो हम देखा किए
उस हूर से आँखें चार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई

धुआं उठा एक आग लगी
उल्फत की शमा रोशान हुई
तमन्ना-ऐ-दीदार ने करवट ली
ख़्वाबों की महफिल गुलशन हुई
मेरी नाज़रों की उस हूर की
नज़रों से मीठी तकरार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई


न जाने तुम किस दुनिया से आई
दिल में ऐसा एक सवाल उठा
होगा जन्नत से कम क्या वोह जहाँ
फिर दिल में ऐसा ख़याल उठा
तुम्हे देखूं तुम्हे चाहूं, तुम्ही को सुनता रहूँ
यही आरजू दिल-ऐ-नादान में बेकरार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई

Friday, May 1, 2009

रास्ते का पत्थर

हैं ठोकर जिसका नसीब
और काली लकीर किस्मत पर
हैं आशियाँ जिसका आम रास्ता
उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर

हर घड़ी एक नया मुकाम
आ जाता हैं किसी नए पथ पर
जिसकी न कोई मंजिल न मक़सूद
उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर

जिसकी अपेक्षा में चमकता है कोयला
के वो जलता हैं स्वः को मथ कर
और हैं जिसकी सहनशक्ति अपरम्पार
फीर भी उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर
हाँ, उसे केहते हैं रास्ते का पत्थर

दस्तूर दुनिया का

हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों
हर इंसान हैं किसी न किसी तरह मजबूर यारों
हो गई हैं सच्चे मन की खुशी जैसे कोसों दूर यारों
आकांक्षाओं की इस मरूभूमि में हर पल होते हैं सपने चकनाचूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों

स्वयं इंसान ही बन गया देखो अरि इंसान का
शवों की सीढ़ी पर करने चला प्राप्त शिखर सम्मान का
अपनी शक्ति से धारण करना चाहता हैं स्वरुप भगवन का
हरण की येही लालसा दम घोटेगी उसके अभिमान का
की बन जायेंगे यहाँ पर कोटि कोटि कंधार एवं अखनूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों

खो गई वो संस्कृति, छुप गया हैं भारत देश हमारा
गाँधी के सपने बिखरे, रहा अनसुना टगोर का संदेश प्यारा
धन-अर्थ बन इष्ट देव, चरित्र रह गया अवशेष हमारा
प्रेम भाव मिटने लगा हैं उभर आया हैं राग-द्वेष हमारा
सब अपनी में राम गए, स्थिति यह हुई सबको मंज़ूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों

इश्क

इश्क की मेरे यारा पहचान की
मिट गई जब जिद उसको अपनाने की
हाथ उठे हैं आज मुद्दतों बाद ऐ आसमान
सुन सके तो सुन ले पुकार दीवाने की

मुझे ग़म दे, खुशी दे मुझे परवाह नही
चाहे दे दे मुझको बलाएं सारे ज़माने की
पर उसके दामन पर कोई आंच न लगे
आरजू हैं ता-जन्दगी उसे हसाने की

छेद्दूंगा उसको तंग करूंगा रूठेगी मनाऊँगा
अब तो आदत सी पड़ गई हैं उसको सताने की
कुछ भी बात होती हैं, दिन हो या रात होती हैं
एक हुक सी रहती हैं दिल में उसको बताने की

मुरझा गया था सिमट गया था सहम गया था
छोड़ दी थी उम्मीद ज़िन्दगी से किसी नजराने की
फिर वो आई छनछनाती छनकती पायल सी
नादान दिल कर बैठा तमन्ना उससे पाने की
इश्क की मेरे यारा पहचान की
मिट गई जब जिद उसको अपनाने की....