Friday, May 1, 2009

रास्ते का पत्थर

हैं ठोकर जिसका नसीब
और काली लकीर किस्मत पर
हैं आशियाँ जिसका आम रास्ता
उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर

हर घड़ी एक नया मुकाम
आ जाता हैं किसी नए पथ पर
जिसकी न कोई मंजिल न मक़सूद
उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर

जिसकी अपेक्षा में चमकता है कोयला
के वो जलता हैं स्वः को मथ कर
और हैं जिसकी सहनशक्ति अपरम्पार
फीर भी उसे कहते हैं रास्ते का पत्थर
हाँ, उसे केहते हैं रास्ते का पत्थर

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