इश्क की मेरे यारा पहचान की
मिट गई जब जिद उसको अपनाने की
हाथ उठे हैं आज मुद्दतों बाद ऐ आसमान
सुन सके तो सुन ले पुकार दीवाने की
मुझे ग़म दे, खुशी दे मुझे परवाह नही
चाहे दे दे मुझको बलाएं सारे ज़माने की
पर उसके दामन पर कोई आंच न लगे
आरजू हैं ता-जन्दगी उसे हसाने की
छेद्दूंगा उसको तंग करूंगा रूठेगी मनाऊँगा
अब तो आदत सी पड़ गई हैं उसको सताने की
कुछ भी बात होती हैं, दिन हो या रात होती हैं
एक हुक सी रहती हैं दिल में उसको बताने की
मुरझा गया था सिमट गया था सहम गया था
छोड़ दी थी उम्मीद ज़िन्दगी से किसी नजराने की
फिर वो आई छनछनाती छनकती पायल सी
नादान दिल कर बैठा तमन्ना उससे पाने की
इश्क की मेरे यारा पहचान की
मिट गई जब जिद उसको अपनाने की....
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वाह वाह, क्या ख़ूब लिखा है, गुरु!
ReplyDeleteMasha Allah .. bahut khub...
ReplyDeleteThis one is best !!!! its toooooo gud !!
ReplyDeletea very gud one,,,,,
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