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Friday, May 1, 2009

दस्तूर दुनिया का

हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों
हर इंसान हैं किसी न किसी तरह मजबूर यारों
हो गई हैं सच्चे मन की खुशी जैसे कोसों दूर यारों
आकांक्षाओं की इस मरूभूमि में हर पल होते हैं सपने चकनाचूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों

स्वयं इंसान ही बन गया देखो अरि इंसान का
शवों की सीढ़ी पर करने चला प्राप्त शिखर सम्मान का
अपनी शक्ति से धारण करना चाहता हैं स्वरुप भगवन का
हरण की येही लालसा दम घोटेगी उसके अभिमान का
की बन जायेंगे यहाँ पर कोटि कोटि कंधार एवं अखनूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों

खो गई वो संस्कृति, छुप गया हैं भारत देश हमारा
गाँधी के सपने बिखरे, रहा अनसुना टगोर का संदेश प्यारा
धन-अर्थ बन इष्ट देव, चरित्र रह गया अवशेष हमारा
प्रेम भाव मिटने लगा हैं उभर आया हैं राग-द्वेष हमारा
सब अपनी में राम गए, स्थिति यह हुई सबको मंज़ूर यारों
हैं बड़ा अनोखा इस दुनिया का दस्तूर यारों