तस्सवूर में जिस हूर हो हम देखा किए
उस हूर से आँखें चार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई
धुआं उठा एक आग लगी
उल्फत की शमा रोशान हुई
तमन्ना-ऐ-दीदार ने करवट ली
ख़्वाबों की महफिल गुलशन हुई
मेरी नाज़रों की उस हूर की
नज़रों से मीठी तकरार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई
न जाने तुम किस दुनिया से आई
दिल में ऐसा एक सवाल उठा
होगा जन्नत से कम क्या वोह जहाँ
फिर दिल में ऐसा ख़याल उठा
तुम्हे देखूं तुम्हे चाहूं, तुम्ही को सुनता रहूँ
यही आरजू दिल-ऐ-नादान में बेकरार हुई
तनहा खामोश अकेले इस दिल में
अजनबी सी एक झंकार हुई
Showing posts with label darling. Show all posts
Showing posts with label darling. Show all posts
Wednesday, May 6, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)